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Goddess Maa Durga
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दुर्गा सप्तशती अध्याय :12

देवी चरित्र पाठ का महत्व

देवी का दुर्गा सप्तशती के पाठ पर देवताओ और मनुष्यों को सन्देश :

जो मन को एकाग्रचित करके प्रतिदिन इन स्तुतियो से माँ का स्तवन करता है उसकी सारी बाधा दूर हो जाती है | जो उत्तम म्हात्म्यका का अष्टमी , चतुर्दशी और नवमी को पाठ करेंगे या सुनेंगे उन्हें कोई पाप नही छु पायेगा | ना ही उनके घर में गरीबी न ही प्रेमीजन से विछोय होगा | उन्हें न ही शत्रु , राजा , लुटेरो ,अग्नि और जल से भी कोई भय नही होगा |

इसलिए दुर्गा सप्तशती का पाठ एकाग्रचित होकर करना और सुनना सभी सुखो को देना वाला है |
यह पाठ जिस मंदिर में होता है उसमे माँ रमती है और सदा उनका सन्निधान बना रहता है | माँ भगवती की प्रसन्नता और भी बढ़ जाती है जब बलि , पूजा हवन और श्रंगार के साथ यह पाठ किया जाता है | इसमे वर्णित युद्ध कथा को जानकर व्यक्ति पराक्रमी हो जाता है | बुरे सपनो से निजात और ग्रह शांति में यह पाठ कल्याणकारी है |



पाठ के साथ और क्या क्या करे :

पशु , पुष्प , धुप , दीप, इत्र , अधर्य और उत्तम सामग्रियों से पूजन , ब्रहामण भोज , होम , प्रतिदिन अभिषेक व नाना प्रकार के भोग अर्पण करने से दान करने के साथ जो 1 वर्ष तक यह आराधना करता है उससे माँ अति प्रसन्न होती है |

दुर्गा सप्तशती के अन्य अध्याय :

मधु कैटभ वध     महिषासुर वध

चण्ड मुण्ड वध    रक्तबीज वध

निशुम्भ शुम्भ वध

निचे दिए गये लिंकों में आप जानेंगे नवरात्रि से जुडी विशेष बाते :

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क्या होते है नवरात्रे

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