माँ दुर्गा लोगो
Goddess Maa Durga
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तारापीठ मंदिर कोलकाता

 Tara Peeth Shaktipeeth   काली घाट शक्तिपीठ के साथ ही पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में में एक और शक्तिपीठ स्थापित है जो माँ तारा देवी को समर्पित है | स्थानीय भाषा में तारा का अर्थ होता है आँख और पीठ का अर्थ है स्थल अत: यह मंदिर आँख के स्थल के रूप में पूजा जाता है | पुराण कथाओ के अनुसार माँ सती के नयन (तारा ) इसी जगह गिरे थे और इस शक्तिपीठ की स्थापना हुई | यह मंदिर तांत्रिक क्रियाकलापो के लिए भी जाना जाता है | प्राचीन काल में यह जगह चंदीपुर के नाम से पुकारी जाती है अब इसे तारापीठ कहते है |

तारापीठ मंदिर निर्माण :

बहूत बहूत साल पहले महर्षि वशिष्ठ ने माँ की कठिन पूजा पाठ करके अनेको सिद्धियां प्राप्त की थीं और उन्ही ने इनका मंदिर का निर्माण भी करवाया था पर समय के साथ वो प्राचीन मंदिर धरा की गोढ़ में समा गया | वर्तमान में जो तारापीठ मंदिर आप देखते है , उसका निर्माण एक माँ के भक्त जयव्रत ने करवाया जो पेशे से एक कारोबारी थे |

तारापीठ मंदिर की बनावट :

तारापीठ मंदिर ना ही ज्यादा बड़ा है ना ही छोटा | मंदिर निर्माण में मुख्यत: संगमरमर मार्बल काम में लिए गये है | छत ढ़लानदार है , जिसे ढोचाला कहते है | मंदिर में द्वार अच्छी तरह से सुन्दर कारिगरी का भारतीय कला का नमुना पेश करते है |
माँ तारा की मूरत के मुख पर तीन आँखे है और मुख सिंदुर से रंगा हुआ है | साथ ही हर अनुपम छवि सजाई जाती है | पास ही शिव प्रतिमा है | मंदिर में प्रसाद के रूप में माँ की स्नान कराई जाने वाली जल , शराब का प्रसाद दिया जाता है |

मुख्य तान्त्रिक संत बामखेपा:

इन्हे यहा मुख्य और प्रमुख तांत्रिकों में से एक माना जाता है | तारापीठ का पागल संत नाम से यह प्रसिद्द है | इन्की समाधी लाल रंग से मंदिर के प्रवेश द्वार के करीब ही है |इस संत की याद में भी एक मंदिर बनाया गया है |

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